करोड़ोँ झूठ बोलेँ हम, पर उनको सच्चे लगते हैँ ।
 
मगर ये प्रीत के धागे हमेँ क्यूँ कच्चे लगते हैँ ।
 ये दोष नज़रोँ का है उनकी या हमारी खूबी ।
 जिसे कोई नहीँ जचता, उन्हेँ हम अच्छे लगते हैँ ।।

कवि गौरव सिँह चौहान 'गाफिल'


साहित्यिक नाम- गौरव 'गाफिल'

जन्मतिथि- 17 दिसम्बर 1988

सम्प्रति- प्रबंध निदेशक; ग्रीनवर्ल्ड शिक्षण संस्थान, उ॰प्र॰।

पैत्रक निवास- देवीगंज, मैनपुरी, उ॰प्र॰।

सम्पर्क- ग्रीनवर्ल्ड शिक्षण संस्थान, से॰1, सुहाग नगर, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश (283203)

चलवार्ता- +91 9412 500 858

email: kavigauravgaafil@gmail.com

 

 लेखन विधाऐँ-

कविता, गीत, गजल, मुक्तक, कहानी, हास्य-व्यंग आदि

प्रमुख रचनायेँ-

व्यंग: भ्रष्टाचार कम कीजिये..., अगर माँग न भरवाये..., बुरा मान जायेँगे.., मँहगाई और हम..,

 गीत: ये भी कोई सावन है.., जुगाड़ है.., नारी और नदिया.., जग आलौकिक करने दो.., सुहागन..,

कहानियॉं: सुहागन, सिमिया, शक, साधूपुर के साधुबाबा, शुक्रिया आदि।

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